ये साल 1966 की बात है। विजय आनंद के निर्देशन में फिल्म तीसरी मंजिल रिलीज हुई। इस फिल्म में शम्मी कपूर और आशा पारिख अभिनय कर रहे थे। इस फिल्म की सफलता में इसके संगीत का बड़ा योगदान रहा। इस फिल्म के गानों को याद कीजिए। एक से बढ़कर एक, मसलन- ओ हसीना जुल्फों वाली जानेजहां, आजा-आजा मैं हूं प्यार तेरा, तुमने मुझे देखा और ओ मेरी सोना रे सोना रे जैसे गाने रातोंरात लोगों की जुबान पर चढ़ गए। इन गानों की कामयाबी के साथ फिल्म इंडस्ट्री में आरडी बर्मन को एक नई पहचान मिली। यूं तो आरडी फिल्म इंडस्ट्री में तब तक एक स्वतंत्र संगीत निर्देशक के तौर पर करीब पांच साल का वक्त बिता चुके थे लेकिन इस फिल्म ने उन्हें स्थापित होने में अहम भूमिका निभाई। इस फिल्म के संगीत में खास किस्म की तेजी थी, नशा था। पाश्चात्य धुनों के साथ साथ इनमें वहां के इंस्ट्रूमेंट्स का जमकर इस्तेमाल हुआ था। यही वजह है कि उस दौर में कुछ लोगों ने आरडी बर्मन की संगीत की जानकारी पर दबी जुबान से सवाल किए। इस सवाल का जवाब आरडी बर्मन ने अगले ही साल रिलीज फिल्म चंदन का पालना के एक गाने से दिया। गाने के बोल थे-ओ गंगा मैया। फिल्म- चंदन का पालना इस्माइल मेमन की फिल्म थी, जिसमें धर्मेंद्र और मीना कुमारी अभिनय कर रहे थे। इस फिल्म के जरिए आरडी बर्मन फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को ये संदेश देना चाहते थे कि उन्हें पारपंरिक संगीत की भी बखूबी जानकारी है। ये बात सच भी थी, आरडी बर्मन ने बाकायदा उस्ताद अली अकबर खान और सामता प्रसाद जैसे विश्वविख्यात कलाकारों के सानिध्य में संगीत की बारीकियां सीखीं थीं। सलिल चौधरी को भी वो अपना गुरू मानते थे। जाहिर है उनके अंदर पारंपरिक संगीत की अच्छी समझ थी। ये गाना आरडी बर्मन ने शास्त्रीय राग जोगिया की जमीन पर तैयार किया था।

शास्त्रीय राग जोगिया के आधार पर हिंदी फिल्मों में और भी कई लाजबाव गाने कंपोज किए गए। जिसमें 1959 में आई फिल्म गूंज उठी शहनाई का दर्द भरा गाना कह दो कोई ना करे यहां प्यार भी शामिल था। इस फिल्म की सबसे खास बात ये थी कि इस फिल्म के संगीतकार वसंत देसाई ने इस फिल्म में शहनाई बजाने के लिए शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह खान को तैयार किया था। खान साहब फिल्मी संगीत से दूरी रखते थे लेकिन इस इकलौती फिल्म में उन्होंने कई जगह पर शहनाई बजाई थी। आप भी मोहम्मद रफी की आवाज में इस फिल्म के दर्द भरे नगमें को याद कीजिए और गुनगुनाइए- कह दो कोई ना करे यहां प्यार को सुनिए। इसके अलावा 1958 में रिलीज फिल्म सोने की चिड़िया का गाना रात भर का है मेहमान अंधेरा और 1963 में रिलीज फिल्म दिल एक मंदिर है टाइटिल गाना भी राग जोगिया की जमीन पर तैयार किया गया था। इस फिल्म का संगीत शंकर जयकिशन ने तैयार किया था और आवाज थी मोहम्मद रफी और सुमन कल्याणपुर की। साल 1962 में एक फिल्म आई थी- संगीत सम्राट तानसेन।  इस फिल्म का संगीत पक्ष शास्त्रीय संगीत पर काफी मजबूती से आधारित था। उस फिल्म में संगीतकार  एसएन त्रिपाठी ने एक गीत इसी राग की जमीन पर कंपोज किया था। गीत के बोल थे- हे नटराज गंगाधर। इस गाने को महेंद्र कपूर ने गाया था।

राग जोगिया में वैराग्य का भाव बहुत प्रखर है। तार सप्तक के सुरों में दर्द, और पुकार का रंग खूब  निखर कर आता है। इसकी जीती जागती मिसाल देखनी है तो राग जोगिया में भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी की गाई प्रसिद्ध ठुमरी सुनिए- पिया मिलन की आस। राग का चलन ऐसा है कि ज्यादातर इस राग में ठुमरियां ही गाई जाती हैं,  ख्याल गायकी इस राग में न के बराबर मिलती है। आइए आपको राग जोगिया के शास्त्रीय पक्ष के बारे में बताते हैं। राग जोगिया भैरव थाट का राग है।  इस राग के आरोह में ‘ग’ और ‘नी’ नहीं लगता है। इसी तरह अवरोह में ‘ग’ नहीं लगता है। राग जोगिया  औडव-षाढव जाति का राग है। इस राग का वादी स्वर ‘म’ और संवादी स्वर ’स’ है। इस राग को गाने बजाने  का समय सुबह माना गया है। राग जोगिया उत्तरांग प्रधान राग है। कुछ जानकार इस राग में तार सा को वादी  और मध्यम को संवादी मानते हैं। वादी और संवादी स्वर के बारे में हम आपको बताते आए हैं कि किसी भी राग में वादी और संवादी स्वर का महत्व वही होता है जो शतरंज के खेल में बादशाह और वजीर का होता है। कुछ दिग्गज कलाकार इस राग में कभी कभी कोमल नी को भी छूते हैं। ऐसा करके वो राग की सुदंरता को और निखारते हैं। आइए अब आपको राग जोगिया के आरोह अवरोह से भी परिचित कराते हैं।

आरोहसा रे म प सां

अवरोहसां नी , रे सा

राग जोगिया में शास्त्रीय गायकी की अदायगी को समझने के लिए आप उस्ताद सलामत अली खान साहब की राग जोगिया में गाई मशहूर ठुमरी सुन सकते हैं, जिसके बोल हैं आन मिलो सजनवा जोबन बीता जाए। इसी राग में आप मेवाती घराने के दिग्गज कलाकार पंडित जसराज की गाई रचना ‘या मेरे मौला’ भी सुन सकते हैं। इमदादखानी घराने के दिग्गज कलाकार उस्ताद विलायत खान का बजाया राग जोगिया भी काफी लोकप्रिय है।

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