जो लोग सरोद बजा रहे हैं और जो सरोद बजाना सीख रहे हैं आप उनको क्या कहना चाहेंगे?

हमने जिंदगी भर यही कोशिश की कि इस बात को समझें कि ये साज क्या कहना चाहता है। हम सरोज बजा रहे हैं ये एक अलग संदेश है यानि हम अपने दिल की बातें कहना चाह रहे हैं। सवाल ये है कि क्या आपके पास इस बात को समझने का समय है कि सरोद क्या कहना चाहता है? इसी सवाल का जवाब जानने में हमने अपना जीवन समर्पित कर दिया है कि सरोद क्या कहना चाहता है इसीलिए हमारा जीवन इस साज से ‘कनेक्टेड’ है। इस साज का मतलब ही मौसिकी है। सितार और सरोज ‘परसियन’ शब्द हैं। सितार यानि सह तार, तीन तार का बाजा। सरूद इसका सही उच्चारण, जिसका मतलब है नगमा, तरन्नुम या मौसिकी। इसीलिए आज दुनिया भर में लोग सरोज बजाते हैं। 500 से ज्यादा कलाकार होंगे जो इस साज को बजा रहे हैं। बस ऊपर वाले से इस बात की दुआ है कि उनमें समर्पण रहे क्योंकि आजकल की सबसे बड़ी परेशानी है कि लोगों को ‘शॉर्टकट’ चाहिए।  हर किसी की चाहत है कि जल्दी से बहुत बड़े आदमी बन जाएं, जल्दी से बहुत सारे पैसे कमा लें। वाद्ययंत्रों में भी एक शॉर्टकट आ गया- कीबोर्ड। जापान या थाइलैंड जहां से भी वो बनता है, हजारों संगीतकारों की रोजी रोटी उससे खत्म हो गई। वो कीबोर्ड बांसुरी की आवाज निकाल रहा है, सितार की आवाज निकाल रहा है। खुदा का शुक्र है कि अभी उसमें सरोद की आवाज नहीं निकलती, लेकिन क्या पता आने वाले वक्त में वो भी आ ही जाए। देखा जाए तो वो भी एक इंसान की काबिलियित ही है कि उसने कीबोर्ड जैसा इंस्ट्रूमेंट बनाया है। तकनीक के नाम पर आप देखिए कितनी चीजें आ गईं फैक्स आ गया, मोबाइल आ गया। इन सभी चीजों के अपने खतरें भी हैं इसलिए तकनीक और ‘ट्रेडीशन’ यानि परंपरा में एक तालमेल होना चाहिए।

तो आप इस तकनीकीकरण को किस तरह देखते हैं, क्या इससे संगीत क्षेत्र को नुकसान पहुंंचा है?

मुझे याद है कि इंस्ट्रूमेंट में तकनीक का इस्तेमाल सबसे पहले साउथ इंडिया में शुरू हुआ था। दरअसल वीणा की आवाज बहुत कमजोर होती है। दक्षिण में काफी बड़े बड़े वीणा वादक थे।  उसमें से कई वीणा वादक थे जिन्होनें उसमें इलेक्ट्रिक करेंट इस्तेमाल किया जिससे आवाज ‘लाउड’ हो गई। इतनी ‘लाउड’ कि कई बार बर्दाश्त के बाहर होने लगी। फिर कुछ लोगों ने यही काम वॉयलिन के साथ किया, किसी ने सितार के साथ किया। धीरे धीरे इलेक्ट्रॉनिक की दुनिया बढ़ती चली गई। वैसे तो हमारे जीवन में इलेक्ट्रिक इलेक्ट्रॉनिक चीजों का बड़ा महत्व हैं लेकिन संगीत की दुनिया में इलेक्ट्रिक के इस्तेमाल से हमें शांति की जगह अशांति मिलने लगी। ‘नॉइस’ होने लगी, शोर होने लगा जबकि संगीत से लोगों को शांति मिलनी चाहिए। अब तो ये बात साबित हो चुकी है कि अगर संगीत असरदार हो तो उसे सुनने से लोगों की बीमारियां दूर हो जाती हैं।

आप सरोद सम्राट हैं तो हम आपसे ये जरूर पूछना चाहेंगे कि नए राग का निर्माण कैसे होता है?

मैंने बहुत से नए राग बनाए। लोग मुझसे पूछते हैं कि नए राग कैसे बनते हैं। दरअसल होता ये है कि अचानक हम कुछ गुनगुनाते हैं। फिर वो धुन हम पर चढ़ जाती है। हम उसे लगातार गाने गुनगुनाते लगते हैं। फिर अंदर से सवाल आता है कि ये हम क्या गा रहे हैं। ये क्या है? फिर लगता है कि ईश्वर की कृपा से एक ‘मेलॉडी’ हमारे पास आई है। फिर हम उसे ‘एनालाइज’ करते हैं कि इसमें क्या क्या सुर लग रहे हैं। बार बार गुनगुना करके,  ‘एनालाइज’ करके देखा तो समझ आया कि ये तो कोई नई आत्मा आ गई है। फिर ऐसा लगता है कि वो आत्मा सामने आकर खड़ी हो गई है और पूछ रही है कि आप मुझे पहचानते हैं क्या?  आप जवाब देते हैं कि नहीं, मैं तो पहला रूप देख रहा हूं। फिर आत्मा पूछती है कि आप मुझे अपनाते हैं या मैं जाऊं। फिर हम उस ‘मेलॉडी’ को अपना लेते हैं और उसे एक नाम दे देते हैं। मुझे याद है कि राग गणेश कल्याण ऐसे ही बनी थी, जिसे मैंने पहली बार पुणे में बजाया था। बाद में मेरी जो ऑरकेस्ट्रा है उसमें भी गणेश कल्याण बजाया। आजकल मैंने विदेशी बैंड के साथ कुछ कॉम्पोज किया है ‘समागम’ के नाम से जो रिकॉर्ड भी हो गया है। दुनिया की कई जानी मानी बड़ी ऑरकेस्ट्रा टीम के साथ मैं ‘समागम’ बजा रहा हूं।  आजकल दुनिया को ‘मर्ज’ ‘कोलैबरेशन’ बहुत पसंद आ रहा है। यूरोपियन संगीत, हिंदुस्तानी संगीत सब एक साथ। ‘सोलो’ तो पूरी दुनिया बजा रही है, मैं भी सोलो बजाता रहूंगा लेकिन ‘सिम्फनी’ का मजा ही अलग है जहां डेढ़ सौ कलाकार एक साथ परफॉर्म कर रहे होते हैं। एक दूसरे के साथ। ‘सोलो’ का चलन हम लोगों के यहां कुछ ज्यादा ही है। असल में तो जब आप दूसरों की खूबियां जान लें तो ये असली कामयाबी है। तब आपको समझना चाहिए कि आपने कुछ हासिल किया। होता ये है कि हमारी नजर दूसरों की कमियों पर ज्यादा रहती है। जब इस बात का इल्म हो जाए कि दूसरे गायक की क्या खूबी है, दूसरे वादक की क्या खूबी है, जैज की क्या खूबी है, यूरोपियन संगीत की क्या खूबी है…जब आपको इन खूबियों का पता लगने लगे तो ये भी भगवान की बहुत बड़ी कृपा है। एक कलाकार के तौर पर बस मैं इतना चाहता हूं कि दुनिया में अमन रहे, शांति रहे। हर कलाकार अपनी मंजिल तक पहुंचे। हर देशवासी को खाना मिले, पानी मिले, शांति मिले, काम मिले। जीवन में एक सुरक्षा की भावना रहे। देश में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में। हम मजहब इंसान को ऊर्जा देने के लिए बनाया गया है। मैं हर मजहब की इज्जत करता हूं। लेकिन भला इस बात में होगा कि अगर दुनिया जितनी जल्दी समझ ले कि पूरी दुनिया का रब एक ही है।

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