कविता कृष्णमुर्ति की पहचान भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बतौर प्लेबेक सिंगर है लेकिन उनका सपना है कि वो अपने पति डॉ सुब्रमनियम के साथ वर्ल्ड टूर पर जाएं और दुनिया उन्हें कृष्णमुर्ति की तरह नहीं बल्कि मिसेज सुब्रमनियम की तरह पहचानें। भारतीय सिनेमा की सफल गायिका कविता जी की नाम दुनियाभर में मशहूर है और उनसे जुड़ी कई बातें उनके फैंस जरुर जानना चाहते हैं। इसी सिलसिले में जब रागगिरी से कविता जी का खास मुलाकात हुई तो हमने इस इंटरव्यू में उनकी पर्सनल लाइफ के बारे में कई सवाल किए। उनकी फिल्म के पहले गाने से लेकर उनकी शादी तक से जुड़े पर्सनल सवाल का उन्होंने क्यो जवाब दिया आइए जानते हैं।

आपका पहला फिल्मी गाना कौन सा था और आपको किस सिंगर के साथ गाना गाने में ज्यादा मज़ा आया?

1980 में एक फिल्म बनी थी मांग भरो सजना। उसका गाना था काहे को ब्याही विदेश जो मेरा पहला गाना फिल्म में रखा गया था। इसके बाद फिर मैंने कुछ कुछ गाने डब किए। इसके बाद ‘प्यार झुकता नहीं’ फिल्म आई। इसमें केसी बोकाड़िया जी और एसएच बिहारी जी थे। उन्होंने लता जी के सारे गाने मुझसे डब कराए। फिर जो फिल्म का आखिरी गाना था- तुमसे मिलकर ना जाने क्यों, जो फिल्म में एक बच्चे पर फिल्माया गया था। मुझे याद है कि बिहारी जी ने मुझसे कहाकि कविता तुम ये गाना जान लगाकर गा दो। अगर ये गाना बच्चे की आवाज में सूट कर गया तो ये गाना हम तुम्हारी ही आवाज में रखेंगे। इस गाने का ‘ड्यूइट’ तो लता जी ही गाएंगी लेकिन बच्चे वाला हम तुम्हारा गाया ही इस्तेमाल करेंगे। मैंने जैसे गाना था- गाया। वो फिल्म सुपरहिट हुई। टी-सीरीज कंपनी भी इस फिल्म की वजह से बड़ी कंपनी बनी। मुझे इस गाने के लिए ‘प्लेटिनम डिस्क’ मिला। फिर मिस्टर इंडिया के गाने गाए। किशोर दा के साथ गाने का मजा ही अलग था। वो बहुत हंसाते थे। उनके साथ बैठकर कोई चुप नहीं रह सकता था। ‘करते हैं हम प्यार मिस्टर इंडिया’ वाले गाने के दिन तो मैं इतना हंस चुकी थी कि मेरी आवाज बैठ चुकी थी। लक्ष्मी दा आए बोले चलो गाना रिकॉर्ड करो। किशोर दा तब भी मजाक कर रहे हैं, चल अब गा माइक पर। इन सबसे अलग भी इस बीच मेरे गाए एक-दो और गाने नोटिस हुए थे। इसी बीच एक दिन लक्ष्मी जी ने मुझे बहुत शॉर्ट नोटिस पर बुलाया। रफी जी के साथ दो लाइन रिकॉर्ड करना था। रफी जी को मैं केबिन में बैठ कर देख रही थी। उनकी गायकी को बयान ही नहीं किया जा सकता है।

आप शुरुआत में लता मंगेशकर जी के गाने डब किया करती थीं लेकिन फिर पंचम दा की फिल्मों में आपको गाना गाने का मौका कैसे मिला?

फिर एक दिन पंचम दा से मुलाकात हुई। मुलाकात पहले भी हुई थी। असल में उन्होंने मुझसे लता जी का एक गाना डब कराया था। लेकिन उस गाने को डब करने के बाद मैंने बहुत सहजता के साथ उनसे कहाकि दादा मैं अगर हर जगह लता जी के गाने डब ही करूंगी तो मेरे लिए बहुत मुश्किल हो जाएगी। पंचम दा ने उसके बाद मुझसे कई गाने गवाए लेकिन उनका वक्त अच्छा नहीं चल रहा था। उनके सारी फिल्में फ्लॉप हो रही थीं। उनका काम कम होता चला गया। उसके बाद उन्होंने मुझसे वायदा किया कि जिस दिन भी उन्हें अच्छी फिल्म मिलेगी वो मुझे गाने के लिए बुलाएंगे। जो वायदा उन्होंने 1942 ए लव स्टोरी के समय पूरा किया। मैं गई और उन्होंने रिमझिम रिमझिम गाना गवाया, फिर दिल ने कहा चुपके से गवाया। उन्हें विश्वास था कि वो फिल्म उनके करियर को बदल देगी। दादा बहुत ‘पॉजिटिव’ इंसान थे। दुख कि बात है कि वो इस फिल्म की कामयाबी नहीं देख पाए। इस फिल्म ने सारे अवॉर्ड्स जीते लेकिन दादा नहीं थे। इसके बाद गायकी का मेरा करियर आगे बढ़ता चला गया।

आप एक सफल प्लेबेक सिंगर थी और डॉ सुब्रमनियम से जब आपकी शादी हुई तब उनके तीन बच्चे थे तो आपकी शादी के लिए घर वाले कैसे मानें?

मैं अपने गायकी में इस कदर खोती चली गई कि मुझे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती थी। मुझे कुत्तों से बहुत प्यार है। घर आती थी तो इन कुत्तों के साथ खेलना। मैंने शादी की चिंता तक नहीं की थी। मैंने तय किया था मुझे शादी नहीं करनी है। मैं सोचती थी कि ऐसे गाते गाते ही मेरा जीवन निकल जाएगा। फिर एक दिन मेरे पास फोन आया कि डॉ. एल सुब्रमनियम एक फिल्म कर रहे हैं और वो मुझे हरिहरन के साथ एक गाना गवाना चाहते हैं। मैंने तारीख नोट कर ली। मैं उनकी पत्नी विजी शंकर को को भी जानती थी। वो लक्ष्मी शंकर जी की बेटी थीं। हम लोग एक ही कॉलेज में पढ़े भी थे। वो मुझसे सीनियर थीं। मुझे पता था कि विजी कैंसर से गुजर गई है। उनके जाने के करीब चार साल बाद की बात है। मैं स्टूडियो में डॉ. सुब्रमनियम से मिली। मैंने अपनी सांत्वना प्रकट की। बच्चों के बारे में पूछा। डॉ. सुब्रमनियम ने कहाकि वो उनकी जिंदगी का एक दुखद पहलू है। इसी वजह से वो अमेरिका से भारत शिफ्ट हो गए। बच्चों को भी लेकर बैंगलोर आ गए। मैंने पाया कि वो एक बेहद शांत इंसान हैं। फिर गाना शुरू हुआ। उन्होंने मुझसे एक लाइन को 19 बार गवाया। तब तक मेरी आदत पड़ चुकी थी कि मैं एक या दो टेक में गाना ओके कर देती थी। खैर वो लाइन मैंने गाया। फिर मैं उनके साथ एक और रिकॉर्डिंग के सिलसिले में बैंगलोर गई क्योंकि उनका पूरा सिस्टम वहीं पर था। वहां मेरी मुलाकात उनके बच्चों से भी हुई। छोटा बेटा अंबी तब 7 साल का था। बेटी 13 साल की थी। उस दौरान हम लोगों ने 3-4 प्रोजेक्ट्स साथ में किए। उनसे मुलाकात होती थी। उनके बच्चों से मुलाकात होती थी। पहली बार मुझे लगाकि वो मेरे लिए एक अच्छे इंसान हैं। फिर जब हमने शादी का फैसला किया तो मां और मामुनी डर गईं।  उन लोगों का डर था कि मैं एक सफल प्लबैक गायक हूं शादी कूरूंगी वो भी ऐसे इंसान से जिसके तीन बच्चे पहले से हैं तो मेरा क्या होगा। उनका डर था कि मुझे मुंबई छोड़कर बैंगलोर जाना पड़ेगा। लेकिन मैंने उन्हें समझाया कि जब इतने साल तक मेरा शादी का मन नहीं किया और अब किया है तो निश्चित तौर पर ये मेरी किस्मत में लिखा है। फिर फटाफट शादी हो गई। इसके बाद मेरा संगीत बदल गया। मेरा नजरिया बदल गया। उन्होंने जो भी संगीत किया है वो अपने लिए किया है पैसे और शोहरत के लिए। उन्हें मेरा गाना निंबूडा निंबूडा बहुत पसंद है। उनके बच्चे शादी के तुरंत बाद मुझे मां बुलाने लगे। जो प्यार मुझे बच्चों से मिला वो अद्भुत है। मुझे रेडीमेड फैमिली मिल गई। अब बड़ा मजा आता है जब कभी कभी लोग घर पर फोन करते हैं और कहते हैं कि मिस्टर कृष्णमूर्ति से बात हो जाएगी क्या? डॉ. सुब्रमनियम पलट कर कहते हैं कि मुझे माफ कीजिए मिस्टर कृष्णमूर्ति गुजर गए और हंसने लगते हैं।  शादी के बाद कई लोगों ने उन्हें मिस्टर कृष्णमूर्ति करके ही बुलाया लेकिन वो सिर्फ हसंते हैं। उनके अंदर कोई ‘इगो’ नहीं है। मैं उनसे अक्सर कहती हूं कि मेरा सपना है कि मैं वर्ल्ड टूर पर उनके साथ जाऊं जहां हर जगह मेरा परिचय ये हो कि मैं डॉ. सुब्रमनियम की पत्नी हूं। भारत के बाहर ज्यादातर दुनिया में मेरा परिचय है यही है भी।

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